तैयार होने के महीनों बाद भी क्यूँ बंद है नगर निगम का वृद्धआश्रम

             नगर निगम द्वारा बनवाया गया वृद्धा आश्रम कार्यशिलता के लिए किसका बाट जोह रहा हैं? या हम बहुत अच्छे हैं, इसका मॉडल रूप बनाकर नगर निगम ने प्रदर्शन के लिए छोड़ रखा हैं!

              महिनों से बनकर तैयार वृद्धा आश्रम पर वरिष्ठ पत्रकार, स्तम्भकार एवं लेखक सुनील दुबे की कलम क्या कह रही हैं, पढ़िए 

बेतिया के सुप्रिया सिनेमा के बगल से एक रोड मुख्य सड़क से निकल कर कमलनाथनगर से गुजरते हुए दरगाह पथ में मिलजाती हैं। इसी पथ में सुप्रिया सिनेमा के बगल में नाला पुलिया के समीप स्थित हैं व्यहुत इलेक्ट्रिक (बिजली से संबंधित दुकान )। दुकान खुलते ही साफ सफाई के बाद दुकान संचालक के द्वारा सेलिन फैन के तीन चार मॉडल स्टैंड पर लगा दिया जाता हैं, जो काफी आकर्षक हैं। पूछने पर पता चला कि कंपनी के द्वारा प्रचार के लिए यह मिला हैं, जिसे प्रतिदिन लगा दिया जाता। जिससे कंपनी का प्रचार होता हैं और ग्राहक आकर्षित होते हैं। वैसे ही बेतिया स्टेशन पर रेलवे ने पुराने जमाने में छोटी लाइन पर चलने वाली छोटी इंजन को प्रदर्शनार्थ लगा रखा है कि, पहले हम क्या थे और अब क्या हैं।

                     इसी तरह लगता हैं बेतिया का नगर निगम प्रशासन भी अपनी जनहितकारी कार्यों एवं कामयाबी के प्रदर्शनार्थ वृद्धा आश्रम बनाकर सोपिस यानि मॉडल रूप में रखा हैं। जैसे बिजली के दुकानदार ने पंखे का मॉडल लटका रखा हैं या रेलवे की भाति धरोहर के रूप में प्रदर्शित कर रहा हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकार के कई हितकारी योजनावों में एक योजना यह भी हैं कि उपेक्षित वृधों के लिए सुविधा सम्पन्न आश्रम बनवाया जाय। लेकिन बेतिया में बनवाया गया सुविधा सम्पन्न यह आश्रम किस काम का, कि खाली खाली पड़ा हुआ हैं। जनता से ही ली गई सेस (शुल्क ) से संचित राशि से सरकार या निगम ऐसे विकास कार्यों को करते हैं।

                  जनता के धन से ही जनता का काम करके अपना पीठ खुद थपथपाते हैं कि मैने यह काम कर दिया। इस वृद्धा आश्रम के निर्माण होने के बाद, अगर आपलोगों को याद होगा कि निगम की महापौर गरिमा सिकारिया अपना पीठ खुद थपथापाती रही। सोशल मीडिया में छायी रही, जैसे बेतिया को बहुत बड़ा या नयाब चीज मिल गया हो। जबकि बेतिया के ही बरवत में वर्षो से संस्थागत वृद्धा आश्रम फल फूल रहा हैं। यह दुःखद पहलू हैं निगम द्वारा बनवाया गया यह आश्रम बेकार रूप में पड़ा हुआ हैं। प्रश्न उठ सकता हैं कि आश्रम में रहनेवाल कोई आएगा तब तो उसे रखा जायेगा? लेकिन इस प्रश्न का उत्तर अपने आप निकल जायेगा कि, भला बरवत के आश्रम में रहने वाले कहा से आजाते हैं। 

              इसमें यह दो राय नहीं हैं कि मिगम ने यह एक बेहतर काम किया हैं, लेकिन इसकी सार्थकता होनी चाहिए। इसकी क्रियाशीलताके लिए प्रयत्नशिलता की जरूरत हैं अन्यथा यह आश्रम वृद्धा से भुतहा आश्रम में तब्दील हो जायेगा।

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