उयलब्धता के बाबजूद खाद की कालाबाज़ारी जारी विभाग द्वारा की गई कार्यवाही नग्नय

         डीएम के आदेश पर अवैध उर्वरक कारोबारियों पर धावादल का छापा परन्तु थोक कारोबारी पकड़ से बाहर

 थोक दूकानदार लूट रहे है और बदनाम हो रहे है छोटे दुकानदार उनकी यही आस है की नये जिलाधिकारी के आने से शायद स्थिति मे सुधार हो

 

आपको बता दें की नरकटियागंज,मैनाटांड,सीकटा, मझौलीया प्रखंड मुख्यालय समेत कई सीमावर्ती क्षेत्रो में संचालित हो रहे उर्वरक दुकानदारों द्वारा नकली कीटनाशक, बीज, बायो डीएपी, नकली फास्फेटिक आदि उर्वरक धरल्ले से बेचे जा रहे है। सुचना की शिकायत पर जिला कृषि पदाधिकारी के द्वारा छापेमारी की गई जो की ऊंट के मुहँ मे जीरा के समान है।

डीएम के आदेश पर भारी दबाब मे अवैध उर्वरक कारोबारियों पर धावा दल ने छापामारी की है। लेकिन छापेमारी की पूर्व सुचना मिल जाने की वजह से अधिकारियो के पहुँचने के पूर्व नरकटियागंज के आधे से अधिक उर्वरक दुकानदार अपना-अपना दुकान बंद करके फरार हो गए। हालाँकि कृषि विभाग के अधिकारियों ने आधे दर्जन अधिक दुकानों से सैंपल जप्त किया है। साथ ही इस दौरान उन्होंने दो प्रमुख दुकानों की जांच की। एवं कुछ दवाईयां एवं अन्य सामग्री को अपने साथ ले गए।

छापेमारी के दूसरे दिन से फिर सभी दुकाने यथावत चलने की सुचना है। बड़ा सवाल यह है की इन अवैध व्यापारियों का संरक्षक कौन है और जिले मे आधे से ज्यादा अवैध चलने वाली दुकानों पर जिला क़ृषि पदाधिकारी द्वारा सघन छापामारी क्यूँ नहीं की जाती है। सूत्रों का बात का विश्वास करें तो इन सबके पीछे दवा के होलसेल व्यापारियों की सेटिंग का नतीजा है जिसमे अधिकारियो के मिली भगत से कतई इंकार नहीं किया जा सकता।

आपको बता दें की, बेतिया चनपटिया नरकटियागंज, मैनाटांड मझौलीया सिकटा के माई स्थान गली समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रो मे होलसेलरो और स्थानीय अधिकारियों के मिली भगत से बगैर लाइसेंस के कई दुकानें संचालित हो रही है। जिनके द्वारा विभिन्न ब्रांडेड कंपनियों के डीएपी के बोरी में बायो डीएपी भरकर बेची जा रही है। और किसानों से दोगुनी दाम वसूल की जा रही है। जिनके द्वारा नकली फास्फेटिक उर्वरक की बिक्री की जा रही है। छापेमारी से नकली उर्वरक के कारोबार करने वालों के बीच हड़कंप मच गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में नकली उर्वरक का धंधा काफी दिनों से फल फूल रहा है। जिससे किसान ठगे जा रहे हैं। नए डीएम पर हम लोगों की आस टिकी हुई है। इस खेल में आधे दर्जन थोक विक्रेता भी शामिल है।

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