जिलाधिकारी ध्यान दें जी एम सी एच बना कूड़े का ढेर

         आखिर हर साल लाखो के भुगतान के बाद भी हर व्यवस्था की तरह जी एम सी एच की सफाई व्यवस्था बदहाल लगा है कचरों का अंबार

             मेडिकल सुप्रीटेंडेंट सुधा भारती का कहना है की हम सिर्फ अपने सरकार को देंगी जबाब जनता के प्रति नहीं है जबाबदेह

आपको बता दें की गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में साफ सफाई के नाम पर प्रति वर्ष करोड रुपए खर्च होते हैं। लेकिन करोड़ों रुपए खर्च के बावजूद यहां कुडे कचरे का अंबार लगा हुआ है। इसकी सुध न जिला प्रशासन ले रही है। और ना गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज प्रशासन। साफ सफाई के नाम पर यहां लूट मची हुई है। हर जगह मेडिकल कचरे, कूड़े कचरें, मांस का लोथड़ा पडा हुआ है। अंदर से लेकर बाहर तक गंदगी ही गंदगी है।

               सेटिंग गेटिंग के खेल में सफाई एजेंसी बाजी मार रही है। गंदगी से मरीजो के साथ-साथ परिजन भी परेशान हैं। गंदगी के कारण आवारा पशुओं की आवाजाही यहां सबसे ज्यादा है। एक ही सफाई एजेंसी कई वर्षों से यहां कार्य कर रही है। किस वजह से कोई अधिकारी उसके खिलाफ कार्यवाही नई करते यह सोचनीय विषय है। आपको बता दें की यह हाल तब है जब पंद्रह अगस्त के नाम पर पुरे अस्पताल परिषर मे विशेष सफाई अभियान चलाया गया और चुने का छिड़काव किया गया है।

                 जिला प्रशासन के अधिकारी के साथ-साथ प्रभारी मंत्री भी हमेशा यहां आते हैं। लेकिन गंदगी पर किसी की भी नजर नहीं है। गंदगी इतनी ना ज्यादा है कि संक्रमित बीमारियों की फैलने की हमेशा खतरा रहती है। जानकारों का मानना है कि साफ सफाई एजेंसी अधिकारियों को मोटी रकम देती है। जिसके कारण गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में साफ सफाई का कार्य केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है। गंदगी के कारण मरीज यहां अपना इलाज तो कराते ही है परन्तु इस गन्दगी से होने वाले नुकसान को समझने के बाबजूद दिग्गज डॉक्टर, व्यवस्थापक  और बड़े मीडिया हाउस की चुप्पी कही ना कही भरस्टाचार की ओर ईशारा करती हैं।

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