अरुणाचल प्रदेश से आज की बड़ी खबर! है जहाँ प्रदेश में बांध के विरोध में हिंसा हुई है जिसके बाद रैपिड एक्शन फोर्स के 250 जवानो को तैनात किया गया है।
देश मे एक तरफ चीन सीमा पर सुरक्षा की चुनौती, तो दूसरी तरफ अपने ही देश में हजारों करोड़ रुपये की बांध परियोजना को लेकर सियांग में प्रदर्शन हिंसक हो गया, पुलिस और सुरक्षा बलों को निशाना बनाया गया और हालात संभालने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स यानी RAF की तैनाती की खबर सामने आई है।
आइये जानते है की आखिर अरुणाचल में ऐसा क्या हुआ कि विकास की परियोजना अब टकराव का कारण बन गई? अरुणाचल प्रदेश के सियांग क्षेत्र में प्रस्तावित अपर मल्टीपरपज प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध तेज हो गया है। यह परियोजना करीब 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित क्षमता वाली विशाल जलविद्युत परियोजना है। लेकिन स्थानीय समुदायों के लोगो की चिंता है कि इस परियोजना से उनकी जमीन, घर, आजीविका और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसी वजह से विरोध शुरू हुआ जिसके बाद 23 अक्टूबर की रात हिंसा की खबर सामने आई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, NHPC कार्यालय और पुलिस स्टेशन को नुकसान पहुंचाया गया, पुलिस वाहनों में आग लगाई गई और कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने प्रतिबंध लागू किए। रिपोर्टों के अनुसार, CRPF की रैपिड एक्शन फोर्स की दो कंपनियां, लगभग 250 जवान, तैनात करने का फैसला लिया गया।
अरुणाचल प्रदेश केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भारत की सामरिक सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जहाँ चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर लगातार सतर्कता बरती जाती है।
अक्टूबर में सीमावर्ती इलाकों में भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि अरुणाचल में भारत और चीन के बीच युद्ध शुरू हो गया है।
अब सवाल सिर्फ बांध बनाने या नहीं बनाने का नहीं है। बल्कि सवाल यह है कि क्या विकास परियोजना शुरू करने से पहले स्थानीय लोगों की चिंताओं का पर्याप्त समाधान किया गया?क्या पर्यावरण और विस्थापन से जुड़े सवालों पर पारदर्शी तरीके से बातचीत होगी? और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ-साथ शांतिपूर्ण विरोध करने वाले लोगों की बात भी सुनी जाएगी? क्योंकि विकास जरूरी है, राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरी है, लेकिन स्थानीय लोगों का विश्वास जीतना भी उतना ही जरूरी है।
क्या सरकार को पहले स्थानीय लोगों की सभी आशंकाएं दूर करनी चाहिए, या राष्ट्रीय हित में ऐसी बड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए?






