ट्रंप-शी की मुलाकात से बदलेगा दुनिया का समीकरण?

         अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की लगभग ग्यारह साल बाद व्हाइट हाउस में अहम मुलाकात हुई। इस मुलाक़ात से क्या बदलेगा दुनिया का समीकरण?

अमेरिका और चीन के बीच चल रही ट्रेड वॉर, टेक्नोलॉजी की प्रतिस्पर्धा और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की व्हाइट हाउस में अहम मुलाकात हुई। यह इस साल दोनों नेताओं की दूसरी आमने-सामने मुलाकात है और शी जिनपिंग की ग्यारह साल से ज्यादा समय बाद पहली व्हाइट हाउस यात्रा है।

इस मुलाक़ात का सबसे बड़ा असर व्यापार युद्ध परहोगा

बैठक के बाद जो बात सामने आयी वह यह थी की अमेरिका और चीन के बीच चल रही व्यापारिक सहमति यानी ट्रेड ट्रूस को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इसे दो महीने के लिए बढ़ाया गया है, ताकि दोनों देश टैरिफ, चीनी सामान की खरीद, रेयर अर्थ मिनरल्स और टेक्नोलॉजी प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर आगे बातचीत कर सकें।

इस मुलाक़ात के बाद फिलहाल दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ टकराव बढ़ने का तत्काल दबाव कुछ कम हुआ है। लेकिन कहानी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है।

शी जिनपिंग ने अमेरिका से ताइवान के मुद्दे पर सावधानी बरतने और चीन-अमेरिका संबंधों को रणनीतिक स्थिरता की दिशा में ले जाने की बात कही। वहीं ट्रंप ने भी दोनों देशों के बीच संवाद और आर्थिक समझौते को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, महत्वपूर्ण खनिजों और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दे भी बातचीत के केंद्र में रहे।

शी जिनपिंग ने अमेरिका और चीन के बीच सैन्य टकराव का खतरा कम करने के लिए लगातार संवाद और संकट-प्रबंधन तंत्र मजबूत करने की बात भी कही।

 

बड़ा सवाल इसका दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

अगर अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव कम रहता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी कंपनियों और उन उद्योगों को राहत मिल सकती है जो चीनी रेयर अर्थ और दूसरे महत्वपूर्ण कच्चे माल पर निर्भर हैं।

लेकिन ध्यान रहे—ताइवान, AI, टेक्नोलॉजी प्रतिबंध और रेयर अर्थ जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के मतभेद अभी खत्म नहीं हुए हैं। इसलिए इस मुलाकात को स्थायी समझौते से ज्यादा तनाव कम करने और बातचीत जारी रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। और इसका असर सिर्फ अमेरिका और चीन पर नहीं, बल्कि भारत समेत पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

                अब नजर इस बात पर होगी कि व्हाइट हाउस की इस मुलाकात के बाद दोनों देश कितनी तेजी से अपने वादों को जमीन पर उतारते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *