बेतिया के संत माइकल्स स्कूल में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस जागरूकता कार्यक्रम मे बाल अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण के प्रति जागरूकता की जानकारी दी गई।
बेतिया के कमलनाथ नगर के संत माइकल्स स्कूल, क्रिश्चियन क्वार्टर, बेतिया में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पश्चिम चंपारण तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के सुरक्षित बचपन अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा, संरक्षण और कानूनी सहायता के प्रति जागरूक करना तथा समाज में बच्चों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने का संदेश देना था।
इस कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप में श्री सत्य प्रकाश शुक्ल उपस्थित रहे। उनके साथ श्री हिंदू कुमार सिंह, श्री सुनील सिरिल, श्रीमती नूतन सिरिल तथा प्रधानाचार्या श्रीमती पुष्पा चौबे उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्या पुष्पा चौबे ने किया।
कार्यक्रम के दौरान सुरक्षित बचपन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इसमें बच्चों के कानूनी अधिकारों, शारीरिक सुरक्षा, भावनात्मक स्वास्थ्य, शिक्षा, सम्मान, जागरूकता तथा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में परिवार, विद्यालय और समाज की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य अतिथि श्री सत्य प्रकाश शुक्ल ने सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत बच्चों के अधिकारों और कानूनी संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक बच्चे को शोषण, हिंसा, दुर्व्यवहार और भेदभाव से सुरक्षित रखने के लिए जागरूकता आवश्यक है। बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देना तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित कानूनी सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग रहने और किसी भी अनुचित व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करने का संदेश दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बाल संरक्षण के लिए कानून, प्रशासन, विद्यालय और समाज के बीच समन्वय आवश्यक है। विद्यालय के निदेशक श्री सुनील सिरिल ने बच्चों के विकास में सुरक्षित वातावरण की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना भी है।
उन्होंने कहा कि जब बच्चे बिना डर के अपनी बात रख पाते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिलते हैं, तभी उनकी प्रतिभा का सही विकास होता है। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से बच्चों के प्रति सहयोगपूर्ण व्यवहार अपनाने तथा उन्हें सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की अपील की।
विद्यालय की उपनिदेशिका श्रीमती नूतन सिरिल ने बच्चों की भावनात्मक सुरक्षा, आत्मसम्मान और मानसिक सहजता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल शारीरिक रूप से सुरक्षित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसा वातावरण भी मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी भय या झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
उन्होंने आपसी सम्मान, समानता और संवेदनशील व्यवहार को सुरक्षित बचपन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने यह संदेश दिया कि बच्चों की बात सुनना, उनकी भावनाओं को समझना और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेना उनके व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है।
इस मौके पर बोलते हुये विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती पुष्पा चौबे ने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विद्यालय और अभिभावकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सतर्कता, संवाद और सही मार्गदर्शन आवश्यक हैं। शिक्षकों और अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों, उनकी चिंताओं और समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को अनुशासन के साथ-साथ विश्वास, सहयोग और सम्मान का वातावरण भी मिलना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों को अपनी समस्याएं खुलकर बताने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की, ताकि समय रहते उन्हें उचित सहायता प्रदान की जा सके।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को समझाया गया कि सुरक्षित बचपन प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने, किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या अनुचित व्यवहार की स्थिति में विश्वसनीय वयस्क से सहायता लेने तथा दूसरों की सुरक्षा और सम्मान का ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया गया।
शिक्षकों ने भी बच्चों के अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, आपसी सम्मान और जिम्मेदार व्यवहार के महत्व को समझाने में सहयोग दिया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों की सुरक्षा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय, प्रशासन और समाज का साझा दायित्व है।
विचार: “बचपन सुरक्षित होगा, तभी भविष्य सशक्त होगा।”
विशेष कोट: “हर बच्चे को मिले सुरक्षा और सम्मान, यही है एक सशक्त समाज की पहचान।”
“बच्चों की मुस्कान की रक्षा करना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने का संकल्प है।”






