अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी आज की सबसे बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO यानी मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नाम पर आज फैसला हो सकता है।
क्या थी प्रक्रिया
इस पद के लिए चयन प्रक्रिया काफी लंबी रही। CEO पद के लिए देशभर से 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। शुरुआती जांच के बाद 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया और अब चयन समिति ने अंतिम रूप से तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया है।
तीन सदस्यीय चयन समिति में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल वी.के. चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल हैं। समिति ने उम्मीदवारों की प्रशासनिक क्षमता, प्रबंधन अनुभव और संस्थागत नेतृत्व जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया है।
क्या है CEO का पद
CEO की नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक पद भर नहीं है। मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, दर्शन व्यवस्था, कर्मचारियों का प्रबंधन, वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था तथा अलग-अलग समितियों के बीच समन्वय जैसे कई महत्वपूर्ण कामों को अधिक व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी CEO की हो सकती है। प्रस्तावित नियमों में CEO और महासचिव के अधिकारों और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट करने की बात सामने आई है।
क्या होगी जबाबदेही
हाल के समय में मंदिर की व्यवस्थाओं और चढ़ावे से जुड़ी शिकायतों तथा जांचों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नए CEO से उम्मीद सिर्फ बेहतर प्रबंधन की नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और मजबूत निगरानी की भी होगी। हालांकि किसी व्यक्ति की नियुक्ति से भ्रष्टाचार खत्म होगा, ऐसा दावा अभी करना जल्दबाजी होगी।
अब देखना यह है की राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO कौन बनता है और क्या वह अयोध्या की इस विशाल धार्मिक व्यवस्था को एक नई प्रशासनिक दिशा दे पाएगा?






