बेतिया नगर निगम इन दिनों शहर को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान में जुटा है। सड़क किनारे ठेला लगाने वाले, गुमटी लगाने वाले और फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई हो रही है। कहीं जेसीबी पहुंच रही है, कहीं सामान जब्त हो रहा है और कहीं दुकानदारों को सड़क खाली करने की हिदायत दी जा रही है।

हाल के दिनों में नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कई इलाकों से अतिक्रमण हटाया गया है। कुछ जगहों पर दुकानों के अस्थायी निर्माण भी तोड़े गए हैं। नगर निगम का तर्क है कि सड़क और सर्विस लेन पर अतिक्रमण तथा बेतरतीब पार्किंग के कारण यातायात प्रभावित होता है। और यह बात बिल्कुल सही है।
लेकिन अब सवाल यह उठता है की क्या यातायात की समस्या सिर्फ गरीबों के ठेले, गुमटी और फुटपाथ की दुकानों से पैदा होती है?
मुख्य मुद्दा
शहर में दूसरी तरफ ऐसे बड़े व्यावसायिक भवन, बिजनेस कॉम्प्लेक्स और बड़े प्रतिष्ठान भी दिखाई देते हैं, जिनके आसपास पार्किंग की समस्या अक्सर नजर आती है। अगर किसी बड़े भवन में पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं है और वहां आने वाले वाहनों को सड़क पर खड़ा होना पड़ता है, तो निश्चित रूप से इसका असर यातायात पर पड़ता है।
ऐसे में सवाल उठता है की नगर निगम की कार्रवाई का पैमाना क्या है? क्या नियम सभी के लिए एक समान हैं? अगर फुटपाथ पर छोटी-सी गुमटी यातायात के लिए बाधा है, तो सड़क के किनारे वाहनों की भीड़ पैदा करने वाला बड़ा व्यावसायिक निर्माण भी जांच के दायरे में क्यों नहीं आना चाहिए?
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बेतिया में सर्विस लेन पर अवैध पार्किंग के खिलाफ पहले भी नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। जून से अभी तक की कार्रवाई के दौरान एक बड़ी रकम जुर्माना वसूले जाने की जानकारी सामने आई है।

अब बात करते हैं भवन निर्माण की
किसी भी बड़े व्यावसायिक भवन या कॉम्प्लेक्स के निर्माण में नक्शा, निर्माण नियम और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होती हैं। मार्च 2026 में बेतिया नगर निगम ने भवन नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को आरटीपीएस काउंटर से जोड़कर इसे आसान और अधिक पारदर्शी बनाने की जानकारी दी थी।
लेकिन सवाल यह है कि जो भवन नियमों के अनुरूप नहीं हैं, उनकी निगरानी कौन करेगा? क्या नगर निगम के पास ऐसे भवनों की सूची है? क्या यह जांच होती है कि स्वीकृत नक्शे में जितनी पार्किंग दिखाई गई थी, वास्तव में उतनी पार्किंग जमीन पर उपलब्ध है या नहीं? क्या किसी बड़े व्यावसायिक भवन ने पार्किंग की जगह को किसी दूसरे उपयोग में तो नहीं बदल दिया? और अगर ऐसा हुआ है तो क्या कार्रवाई हुई?
ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब नगर निगम प्रशासन को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।
और सबसे गंभीर भ्रष्टाचार का सवाल
जब छोटे दुकानदार पर कार्रवाई होती है तो कार्रवाई जमीन पर दिखाई देती है। लेकिन बड़े निर्माण के मामले में अगर नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आती हैं और फिर भी कार्रवाई नहीं होती, तो लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है? और क्या निरीक्षण नहीं होता? क्या शिकायतें नहीं पहुंचतीं? या फिर कार्रवाई की प्रक्रिया ही अलग है?
यहां एक बात साफ कर देना जरूरी है की बिना किसी ठोस जांच और दस्तावेजी प्रमाण के किसी अधिकारी पर मिलीभगत का आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
लेकिन प्रशासन से सवाल पूछना बिल्कुल जरूरी है। अगर कोई अवैध निर्माण है तो कार्रवाई क्यों नहीं?
अगर पार्किंग की व्यवस्था नियमों के अनुसार है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता
आज बेतिया में फुटपाथ पर छोटा व्यवसाय करने वाला व्यक्ति नगर निगम की कार्रवाई से परेशान है। किसी का ठेला हट रहा है।किसी की गुमटी टूट रही है। किसी का शेड हटाया जा रहा है। दूसरी तरफ शहर को व्यवस्थित करने के नाम पर अगर सिर्फ छोटे कारोबारियों को हटाया जाएगा और बड़े निर्माणों की समान स्तर पर जांच नहीं होगी, तो सवाल तो उठेंगे ही।
माना की शहर अतिक्रमण मुक्त होना चाहिए। लेकिन कार्रवाई का आधार व्यक्ति की आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि नियम होना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों से भी सवाल
और अब सवाल स्थानीय जनप्रतिनिधियों से। जो जनप्रतिनिधि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं, वे इन निर्माणों और पार्किंग की समस्या पर क्या कर रहे हैं?
क्या उन्होंने नगर निगम से बड़े व्यावसायिक भवनों की पार्किंग और नक्शे की जांच की मांग की? क्या उन्होंने ऐसे निर्माणों की सूची मांगी? क्या उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि किन भवनों को अनुमति दी गई और किन भवनों के खिलाफ कार्रवाई हुई?
अगर गरीबों के अतिक्रमण पर आवाज उठती है, तो बड़े निर्माणों पर भी वही आवाज क्यों नहीं? क्या नियम सभी के लिए बराबर हैं? यह सवाल सिर्फ नगर निगम से नहीं, बल्कि शहर के जनप्रतिनिधियों से भी है।
हालाँकि बेतिया को अतिक्रमण मुक्त करना जरूरी है। शहर की सड़कें जाम मुक्त हों, फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए हों और यातायात व्यवस्थित हो यह हर नागरिक की जरूरत है।लेकिन व्यवस्था तभी भरोसेमंद लगेगी जब कार्रवाई का पैमाना सभी के लिए एक जैसा होगा।
छोटा हो या बड़ा निर्माण अगर नियमों का उल्लंघन है तो जांच होनी चाहिए। अगर पार्किंग नियमों का उल्लंघन है तो कार्रवाई होनी चाहिए। बेतिया में अतिक्रमण हटाने का अभियान छोटे और बड़े—दोनों पर समान रूप से लागू होगा?






