सावन मे मंदिरो के आसपास बिक रही है माँस धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले मौन

 

          जी हाँ वैसे तो मंदिरो के आसपास एक निश्चित दायरे मे माँस की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है परन्तु बेतिया जहाँ धर्म के नाम राजनीती करने वालो को यह दिखाई नहीं देता क्या उन्हें सिर्फ वोट बैंक से मतलब है या धर्म सिर्फ दिखावा यह तो उनका दिल जाने।

आपको बता दें की सामान्य नियमों के अनुसार दुकान किसी भी धार्मिक स्थल की बाउंड्रीवॉल से कम से कम 50 मीटर और मुख्य प्रवेश द्वार से कम से कम 100 मीटर दूर होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों परन्तु वास्तविकता किसी से छुपी नहीं है।

नगर निगम अधिकारियो की बात करें तो उनके लिये नियमो का अनुपालन कोई मायने नहीं रखता है। आपको बता दें की मांस बेचने के लिए दुकानदारों के पास नगर विकास एवं आवास विभाग का वैध लाइसेंस होना जरूरी है।  सड़क के किनारे या खुले में मांस लटका कर बेचने पर मनाही है। दुकानों को काले शीशे या पर्दे से ढकना होगा ताकि बाहर से मांस दिखाई न दे। नियमों का उल्लंघन करने पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

              मांस के अवशेष (जैसे हड्डी, खाल, आंत आदि) को खुले में, सड़कों पर या नालियों में नहीं फेंका जा सकता। दुकानदारों को इस कचरे को ढककर रखना होगा और सीधे नगर निगम के कचरा वाहनों को सौंपना होगा। इन नियमो का पालन नहीं होने पर जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है।पहली बार उल्लंघन करने पर पाँच तक का वित्तीय जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार नियमों की अनदेखी करने पर दुकान का सामान जब्त करना, लाइसेंस रद्द करना और दुकान को हमेशा के लिए बंद करने की विधिक कार्रवाई की जाती है।

                परन्तु ऐसा लगता है की चांदी के सिक्कों की खनक ने अधिकारियो और हिन्दू धर्म की राजनीती करने वालो के हाथ बाँध रखे है।

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