अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। पिछले 48 घंटों में ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक ताकत को निशाना बनाने की कोशिश की, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई और यमन में ईरान समर्थित हूती लड़ाकों की गतिविधियों ने पूरे क्षेत्र की चिंता बढ़ा
अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला
जानकारी के मुताबिक 9 सितंबर को ईरान ने होर्मुज़ के पास अमेरिकी नौसेना के करीब 10 जहाजों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी रक्षा प्रणालियों ने मिसाइलों को रोक लिया और किसी जहाज के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन यह हमला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान अब अमेरिकी नौसैनिक शक्ति को सीधे चुनौती देने की कोशिश कर रहा है।
होर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही ठप
10 सितंबर को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सिर्फ सात जहाजों के गुजरने की जानकारी सामने आई, जबकि युद्ध से पहले यहां रोजाना करीब 125 बड़े वाणिज्यिक जहाज गुजरते थे। यही रास्ता दुनिया के कच्चे तेल और LNG कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर तेल, गैस, समुद्री व्यापार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
यमन मे खुला नया मोर्चा
ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने यमन के महत्वपूर्ण मोचा बंदरगाह पर कब्जे का दावा किया है और लाल सागर के तट पर अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर भी खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान पर दबाव बढ़ाने के बावजूद युद्ध को खत्म कैसे किया जाए। अमेरिकी नौसेना की क्षेत्र में मौजूदगी जारी है और लंबे सैन्य अभियान की आशंका जताई जा रही है।
अगर इन सभी स्थितियों पर गौर किया जाय तो पिछले 48 घंटों की तस्वीर साफ है।ईरान अमेरिकी नौसैनिक ताकत को चुनौती दे रहा है, होर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही तेजी से घट रही है, यमन में नया मोर्चा खुल रहा है। मतलब यह है की आने वाले समय मे तेल और गैस पर वैश्विक संकट और बढ़ सकता है।
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