खबर का हुआ असर! नींद से जागे अधिकारी नियम विरुद्ध निर्माण करने वालो को भेजा नोटिस लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब ??
कुछ लोगो को हुआ नोटिस हुआ बाकी पर कार्रवाई कब ? निर्माण के समय अधिकारी क्यों सोते रहे? बेतिया नगर निगम पर फिर सवाल अभी भी बाकी ??
बेतिया में नगर निगम की कार्रवाई और उसके पैमाने को लेकर हमारे चैनल ने सवाल उठाया था। सवाल था—क्या नगर निगम की कार्रवाई का पैमाना सभी के लिए एक समान है?
अगर फुटपाथ पर लगी छोटी-सी गुमटी यातायात में बाधा मानी जाती है और उसके खिलाफ कार्रवाई होती है, तो सड़क किनारे ऐसा बड़ा व्यावसायिक निर्माण, जिसके कारण वाहनों की आवाजाही और पार्किंग की समस्या पैदा हो रही है, वह भी जांच के दायरे में क्यों नहीं आना चाहिए?
हमारी खबर के बाद अब नगर निगम ने कुछ लोगों को नोटिस जारी किया है। इसे खबर के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है।
लेकिन नोटिस जारी होने के साथ ही एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
निर्माण नियमों के विपरीत था, तो निर्माण के समय इसकी निगरानी कौन कर रहा था? नगर निगम के संबंधित अधिकारी और कर्मचारी क्या उस समय मौके पर नहीं गए?क्या निर्माण की अनुमति और नक्शे की जांच नहीं हुई? अगर नियमों का उल्लंघन हुआ, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया?
क्योंकि केवल निर्माणकर्ता को नोटिस देने से पूरी जिम्मेदारी तय नहीं होती। प्रशासनिक व्यवस्था में यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति बनी कैसे और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही।
बेतिया में सर्विस लेन पर अवैध पार्किंग के खिलाफ नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। ऐसे में सवाल सीधा है। क्या कार्रवाई सिर्फ छोटे अतिक्रमण और छोटे कारोबारियों तक सीमित रहेगी, या बड़े निर्माण और उनकी अनुमति/निगरानी की प्रक्रिया की भी निष्पक्ष जांच होगी? अब शहर के लोगों की नजर नगर निगम की अगली कार्रवाई पर है। नोटिस से आगे कार्रवाई होगी या मामला सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा?
बड़ा सवाल ??
क्या जिम्मेदारी सिर्फ निर्माण करने वाले की तय होगी, या उस पूरी व्यवस्था की भी जांच होगी, जिसने निर्माण को समय रहते रोकने की जिम्मेदारी निभाई थी?







